ब्लैक लाइव्स मैटर का समर्थन करने के लिए, भारतीय खिलाड़ियों ने रविवार को दुबई में पाकिस्तान के खिलाफ अपने हाई-ऑक्टेन टी 20 विश्व कप 2021 सुपर 12 मुकाबले से पहले घुटने टेक दिए।
शनिवार को इंग्लैंड के क्रिकेटरों ने वेस्टइंडीज के अपने समकक्षों के साथ घुटने टेक दिए। पहले बल्लेबाजी के लिए भेजे गए, भारतीय सलामी बल्लेबाज केएल राहुल और रोहित शर्मा बीच में चले गए, बाद में प्रतिद्वंद्वी कप्तान बाबर आजम से बात की कि वे घुटने टेकेंगे या नहीं।
पाकिस्तान के कप्तान बाबर के लिए यह कोई समस्या नहीं थी क्योंकि राहुल और रोहित ने घुटने टेक दिए जबकि बाकी भारतीय टीम ने सीमा रेखा के ठीक बाहर ऐसा ही किया। इस बीच, पाकिस्तान के खिलाड़ियों ने अपने हाथों को अपनी छाती पर रखने के लिए चुना, न कि घुटने के बल चलने के लिए।
यह आंदोलन 25 मई 2020 की एक घटना की वजह से लोगों के बीच मशहूर हो गया है। बहुत से लोग अब तक इस आंदोलन में शामिल हो चुके हैं परंतु काफी ज्यादा लोगों को इस आंदोलन के बारे में जानकारी ही नहीं है। 25 मई 2020 को हुई एक निर्मम हत्या जो अमेरिकन पुलिस अधिकारियों ने की, उसकी वजह से अमेरिका में नस्ल वाद संस्थागत और परंपरागत संस्थान ने आवाज उठाई जो पहली बार नहीं हुआ है। चलिए आपको बता देते हैं ब्लैक लाइव मैटर आंदोलन क्या है और इसका लक्ष्य क्या है?
दरअसल 25 मई 2020 को अमेरिकन पुलिस अधिकारियों ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर रंग से काले व्यक्ति की बेवजह ही निर्मम हत्या कर दी। यह पूरी घटना बीच रोड पर अंजाम दी गई जिसे बहुत से लोगों ने अपने कैमरे में कैद भी कर लिया। पुलिस द्वारा मारे गए उस व्यक्ति का नाम जॉर्ज फ्लाइड था। अमेरिका में यह पहली बार नहीं हुआ था क्योंकि पहले 20 साल 2014 के अगस्त में पुलिस अधिकारियों द्वारा माइकल ब्राउन नामक अफ्रीकी अमेरिकन की हत्या कर दी गई थी। इससे पहले भी गोरे और काले के रंगभेद के चलते बहुत सारी हत्याएं इस प्रकार की जा चुकी है। 25 मई को हुए इस हादसे के बाद सोशल मीडिया पर अमेरिकी लोगों ने इस कैंपेन का प्रारंभ कर दिया।
कैसे हुई ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन की शुरुआत?
ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन केवल अमेरिका में ही नहीं बल्कि अमेरिका के बाहर यूरोप लैटिन अमेरिका के साथ साथ ब्रिटेन में भी लगभग साल 2013 से चल रहा है। क्योंकि इन सब देशों में गोरे और काले लोगों के बीच रंगभेद चलता रहता है जिसमें गोरे लोगों को दबाया जाता है और छोटी सी गलती होने पर ही उन्हें बेवजह मार दिया जाता है। इस निर्मम अपराध को रोकने और विरोध करने के लिए ही काले लोगों द्वारा ब्लैक लाइंस मैटर आंदोलन का प्रारंभ किया गया जो अब वर्तमान में भी चल रहा है।
जानकारी के अनुसार यह बताया जा रहा है कि जॉर्ज फ्लाइड रंग से काला जरूर था परंतु उसने कोई भी अपराध नहीं किया था फिर भी अमेरिकन पुलिस अधिकारियों ने उसकी निर्मम हत्या कर दी। दरअसल यह दुर्घटना 25 मई के दिन हुई जब जॉर्ज फ्लाइट एक पास की ही दुकान पर बिस्किट लेने पहुंचा वहां पर उसने दुकानदार को $20 देकर बिस्किट खरीदा। उस दुकानदार ने जॉर्ज को बिस्किट दे दिया परंतु बाद में उसे लगा कि जॉर्ज द्वारा दिए गए $20 नकली हैं जिसके चलते उन्होंने जोर से कहा कि अपने पैसे वापस ले और मुझे बिस्किट का पैकेट वापस दे दे। लेकिन जॉर्ज बिस्किट का पैकेट लेकर वहां से चला गया और बगल की दुकान में जाकर बैठ कर बिस्किट खाने लगा। वह अपने दोस्तों के साथ वहां पर बैठा हुआ था तभी दुकानदार ने पुलिस को फोन करके जानकारी दी कि यहां पर एक आदमी है जिसने नकली डॉलर देकर मुझसे बिस्किट ले लिया है।
अमेरिका की पुलिस के बारे में तो आप जानते ही हैं कि वे एक छोटी सी बात को लेकर कितनी जल्दी तीव्रता से उस स्थान पर पहुंच जाते हैं और अपराधी को पकड़ लेते हैं। ठीक ऐसा ही जॉर्ज को गिरफ्तार करते समय हुआ, तुरंत अमेरिकन पुलिस वहां पर पहुंच गई और उन्होंने जॉर्ज को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस जॉर्ज को पुलिस गाड़ी में बैठ आने लगी परंतु खींचातानी में जॉर्ज जमीन पर गिर गया। उसने पुलिस अधिकारियों से कहा कि बंद कमरे में मेरा दम घुटता है कृपा करके मुझे गाड़ी में ना बिठाए। परंतु पुलिस अधिकारियों ने नहीं सुना तभी वहां पर तीसरा पुलिस अधिकारी आया और उसने जॉर्ज को अपने घुटने के नीचे दबा लिया।
लगभग 9 मिनट तक उस पुलिस अधिकारियों ने जॉर्ज की गर्दन को अपने घुटने के नीचे दबाए रखा। यह पूरी वारदात लोग कैमरे में कैप्चर कर रहे थे। 9 मिनट बाद जब पुलिस ने अपना पैर जॉर्ज की गर्दन से हटाया तो देखा जॉर्ज मर चुका था क्योंकि उसका दम घुट गया था और वह वहीं पर मर गया। यह दुर्घटना सोशल मीडिया पर धीरे-धीरे वायरल होने लगी और अमेरिका के लोगों ने इस दुर्घटना के विरोध में प्रदर्शन करना भी प्रारंभ कर दिया। धीरे-धीरे यह प्रदर्शन अमेरिका के पूरे हिस्से में फैल गया और अमेरिका से होता हुआ यह दुनिया के बहुत सारे देशों में पहुंच गया।
लोगों का कहना है कि गोरे काले के रंगभेद की वजह से पुलिस अधिकारियों ने ऐसा किया और यह सदियों से होता आया है और अब भी अधिकारी ऐसा ही करते हैं। इसी विरोध के प्रदर्शन के चलते सोशल मीडिया पर ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन चल रहा है।

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